Friday, July 30, 2010

रवि बास्वानी को समर्पित...

Rest in Peace dear Ravi Vaswani
मैं एक कलाकार हूँ

आकाश में हैं बादल जैसे,
मैं वैसे ही निराकार हूँ,
मैं भावों का व्यापार हूँ,
और शब्दों का तलबगार हूँ,
मैं, एक कलाकार हूँ…

मैं राम भी हूँ और रावण भी,
आज़ान भी हूँ और इसाह भी,
मुझको ना बांधो धर्मों में,
मैं खुद में इक संसार हूँ.
मैं, एक कलाकार हूँ…

परदे से मुझको मत नापो,
मैं नहीं हूँ वह जो दिखता हूँ,
वो छवी है जो मैं पाता हूँ,
और उसमे मैं रम्म जाता हूँ,
मैं, एक कलाकार हूँ…

क्यों मूल पे मेरे हँसते हैं,
वेतन तो वो भी पाते हैं,
अट्टाहस मुझ पर करते हैं,
जब अपनी जुगत लगाता हूँ,
मैं, एक कलाकार हूँ…

मैंने लोगों को देखा है,
जो खूब तमाशे करते हैं,
हर रात नए मयखाने में,
वो ढेरों वादे करते हैं,
उनसे यह पूछे आज कोई,
मुझ पर हैं नीर बहाते क्यों,
मैं ही न समझा देर तलक,
पर, अब जाने भी दो यारों…

मैं तो परदे का खेल ही था,
अब खेल ख़तम कर जाता हूँ,
कल फिर आऊंगा लौट कर,
यह तुमको यकीन दिलाता हूँ,
फिर से आंसू बोकर अपने,
तुमको मैं हंसी पिलाऊंगा,
और फिर तुमको मैं व्यंगों के,
सागर में लेकर जाऊँगा,
मैं अब भी, कलाकार हूँ… और सदैव रहूँगा…


- अमित शर्मा