Tuesday, April 20, 2010

MAA NE MUJHSE JHOOTH KAHA THA...

माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

एक परी बादल से आकर, मुझको खेल खिलाएगी,
तारों को झोली में भरकर, मुझे चाँद की सैर कराएगी...

फूलों की क्यारी से आकर, तितली मुझे हंसाएगी,
और चूस चूस कर फूलों से, रंगों के ढेर लगाएगी...

जब तक मैं आँख ना खोलूँगा, सूरज अंकल भी सोयेंगे,
सब सोते ही रह जायेंगे और पंछी गीत ना गाएंगे...

यह सब मुझसे मेरी माँ कहती थी, पर.....
माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

बादल में परियां ना देखीं, पर शोले भड़के पाए हैं,
झोली में तारे ना पाए, पर आंसू भर भर आये हैं...

फूलों के बाग़ तो उजड़ गए, फिर तितली कहाँ से आएगी???
जो ढेर रंगों का माँ कहती थी, वह लाल है क्यूँ मैं ना समझा...

पर एक बात मैं समझ गया की,
माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

मुझको इतनी तकलीफ़ ना होती, गर माँ मुझसे सब झूठ ना कहती...
पर सोच रहा हूँ खड़ा खड़ा, वोह दुनिया होती, तो कैसी होती...

क्यूँ माँ ने मुझसे झूठ कहा था,
क्यूँ माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

6 comments:

Pravin Nair said...

Woww such a cynical but truly beautiful poem!

Simply loved the lines!preserve the beauty of ur writing!

I also write poems in english..if ur time,patience n interest permits, pls do visit me at:

http://assorted-platter.blogspot.com

ur comment wld be invaluable!Tx.

sweetchilly23 said...
This comment has been removed by the author.
sweetchilly23 said...

mujhko yaqeen hai sach kehti thi jo bhi ummi kehti thi:) --sweetchilly23@gmail.com

sweetchilly23 said...

this line strait went thru my heart फूलों के बाग़ तो उजड़ गए, फिर तितली कहाँ से आएगी??? :( if u hav written this its rely true..~~sweetchilly23@gmail.com

Ana said...

Wow loved your poem. Looks like you havent updated your blog for quite some time. You must write and keep updating...cheers!!!

Ana said...

Wow loved your poem. Looks like you havent updated your blog for quite some time. You must write and keep updating...cheers!!!