Tuesday, April 20, 2010

MAA NE MUJHSE JHOOTH KAHA THA...

माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

एक परी बादल से आकर, मुझको खेल खिलाएगी,
तारों को झोली में भरकर, मुझे चाँद की सैर कराएगी...

फूलों की क्यारी से आकर, तितली मुझे हंसाएगी,
और चूस चूस कर फूलों से, रंगों के ढेर लगाएगी...

जब तक मैं आँख ना खोलूँगा, सूरज अंकल भी सोयेंगे,
सब सोते ही रह जायेंगे और पंछी गीत ना गाएंगे...

यह सब मुझसे मेरी माँ कहती थी, पर.....
माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

बादल में परियां ना देखीं, पर शोले भड़के पाए हैं,
झोली में तारे ना पाए, पर आंसू भर भर आये हैं...

फूलों के बाग़ तो उजड़ गए, फिर तितली कहाँ से आएगी???
जो ढेर रंगों का माँ कहती थी, वह लाल है क्यूँ मैं ना समझा...

पर एक बात मैं समझ गया की,
माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

मुझको इतनी तकलीफ़ ना होती, गर माँ मुझसे सब झूठ ना कहती...
पर सोच रहा हूँ खड़ा खड़ा, वोह दुनिया होती, तो कैसी होती...

क्यूँ माँ ने मुझसे झूठ कहा था,
क्यूँ माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

Saturday, April 3, 2010

Back to Delhi...

I am back in Delhi. This time to start working on a small docu film shot digitally. What excites me the most is to be working on my favorite tool - AVID - once again.
The edit starts Monday. Will post more soon.