Monday, November 17, 2014

Amit Sharma awarded with the Award of Merit for "Simply Love"

California, 17.11.2014 – Amit Sharma, of CINEMAMIT, has won a prestigious Award of Merit from the IndieFEST Film Awards. The award was given for Amit Sharmas' exciting short film, Simply Love, which left a beautiful social message of love. Simply Love is a short film based on the real life incident of Rev. Dada J. P. Vasvani.
"The greatest power in the world and the most unused one - is the power of love" - Rev. Dada J. P. Vasvani
“It was a challenge to weave a story around a small real life incident of Rev. Dada J. P. Vaswani's life. But nothing is impossible when it is in agreement with god. I am thankful to Pilgrim Productions for giving me this opportunity to spread love in the world through my skills and craft and to serve in the presence of Rev. Dada J. P. Vasvani. I am also thankful to the entire crew and cast for such amazing show in such tight deadlines" - Amit Sharma (Writer, Editor, Director)
The IndieFEST Film Awards recognizes film, television, videography and new media professionals who demonstrate exceptional achievement in craft and creativity, and those who produce standout entertainment or contribute to profound social change. Entries are judged by highly qualified professionals in the film and television industry. Information about the IndieFEST and a list of recent winners can be found at www.theindiefest.com.
In winning an IndieFEST Film Award, Amit Sharma joins the ranks of other high-profile winners of this internationally respected award including Liam Neeson as the narrator of Love Thy Nature, Julia Louis-Dreyfus and Tom Hall for Generosity of Eye and European heavyweight Roland Joffee for The Lovers starring Josh Hartnett.  Rick Prickett, who chairs The IndieFEST Film Awards, had this to say about the latest winners, “The IndieFEST is not an easy award to win. Entries are received from around the world from powerhouse companies to remarkable new talent. The IndieFEST helps set the standard for craft and creativity. The judges were pleased with the exceptional high quality of entries. The goal of The IndieFEST Film Awards is to help winners achieve the recognition they deserve.”
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Monday, June 25, 2012

"Maine phir aaj ek rishta nibhaya hai"




Maine phir aaj ek rishta nibhaya hai,
Phir aaj meri palkon ki kyariyan gili hain…

Yoon toh maine zindagi ki hai kitaab kar di puri,
Par usme kyun sabhi pankitiyan, sili sili hain…

Main rishton ki maala yunhi pirota rahunga,
Geet nainon mein apne bhigota rahunga,
Koyi toh ik din mujhse bhi nibhayega,
Gili kyariyon ko choom kar sukhayega,

Shayad uss waqt tak sookh chuke honge Meri kyariyon mein paudhe,
Par unn sookhe paudhon mein bhi koyi phool toh khilayega…

Maine phir aaj ek rishta nibhaya hai,
Phir aaj meri aankhon ki kyariyan gili hain…

Tuesday, June 7, 2011

"सुबह आँख खुली तो"

इक बूँद को पत्ते पर चमकते देखा,
सुबह आँख खुली तो...

कुछ देर वहाँ बैठा तो पाया, की शबनम के समन्दर से घिरा हूँ मैं...
कई रोज़ मैं भी समन्दर में नहाया करता,

पर आज इक बूँद को, पलकों के किनारे पाया,
सुबह आँख खुली तो...

- अमित शर्मा

Friday, July 30, 2010

रवि बास्वानी को समर्पित...

Rest in Peace dear Ravi Vaswani
मैं एक कलाकार हूँ

आकाश में हैं बादल जैसे,
मैं वैसे ही निराकार हूँ,
मैं भावों का व्यापार हूँ,
और शब्दों का तलबगार हूँ,
मैं, एक कलाकार हूँ…

मैं राम भी हूँ और रावण भी,
आज़ान भी हूँ और इसाह भी,
मुझको ना बांधो धर्मों में,
मैं खुद में इक संसार हूँ.
मैं, एक कलाकार हूँ…

परदे से मुझको मत नापो,
मैं नहीं हूँ वह जो दिखता हूँ,
वो छवी है जो मैं पाता हूँ,
और उसमे मैं रम्म जाता हूँ,
मैं, एक कलाकार हूँ…

क्यों मूल पे मेरे हँसते हैं,
वेतन तो वो भी पाते हैं,
अट्टाहस मुझ पर करते हैं,
जब अपनी जुगत लगाता हूँ,
मैं, एक कलाकार हूँ…

मैंने लोगों को देखा है,
जो खूब तमाशे करते हैं,
हर रात नए मयखाने में,
वो ढेरों वादे करते हैं,
उनसे यह पूछे आज कोई,
मुझ पर हैं नीर बहाते क्यों,
मैं ही न समझा देर तलक,
पर, अब जाने भी दो यारों…

मैं तो परदे का खेल ही था,
अब खेल ख़तम कर जाता हूँ,
कल फिर आऊंगा लौट कर,
यह तुमको यकीन दिलाता हूँ,
फिर से आंसू बोकर अपने,
तुमको मैं हंसी पिलाऊंगा,
और फिर तुमको मैं व्यंगों के,
सागर में लेकर जाऊँगा,
मैं अब भी, कलाकार हूँ… और सदैव रहूँगा…


- अमित शर्मा




Tuesday, April 20, 2010

MAA NE MUJHSE JHOOTH KAHA THA...

माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

एक परी बादल से आकर, मुझको खेल खिलाएगी,
तारों को झोली में भरकर, मुझे चाँद की सैर कराएगी...

फूलों की क्यारी से आकर, तितली मुझे हंसाएगी,
और चूस चूस कर फूलों से, रंगों के ढेर लगाएगी...

जब तक मैं आँख ना खोलूँगा, सूरज अंकल भी सोयेंगे,
सब सोते ही रह जायेंगे और पंछी गीत ना गाएंगे...

यह सब मुझसे मेरी माँ कहती थी, पर.....
माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

बादल में परियां ना देखीं, पर शोले भड़के पाए हैं,
झोली में तारे ना पाए, पर आंसू भर भर आये हैं...

फूलों के बाग़ तो उजड़ गए, फिर तितली कहाँ से आएगी???
जो ढेर रंगों का माँ कहती थी, वह लाल है क्यूँ मैं ना समझा...

पर एक बात मैं समझ गया की,
माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

मुझको इतनी तकलीफ़ ना होती, गर माँ मुझसे सब झूठ ना कहती...
पर सोच रहा हूँ खड़ा खड़ा, वोह दुनिया होती, तो कैसी होती...

क्यूँ माँ ने मुझसे झूठ कहा था,
क्यूँ माँ ने मुझसे झूठ कहा था...

Saturday, April 3, 2010

Back to Delhi...

I am back in Delhi. This time to start working on a small docu film shot digitally. What excites me the most is to be working on my favorite tool - AVID - once again.
The edit starts Monday. Will post more soon.